राधा…. राधा…

गोवाले बोले ,
राधा, राधा, तेरा कान्हा काला
‘तु’ चंद्रमा जैसी गोरी फिर भी फॅंस गई छोरी
राधा बोली,
मेरा कान्हा सबसे न्यारा सबसे निराला
उसे नजर ना लगे इसलिए वह काला.
गोवाले बोले ,
राधा राधा तेरा कान्हा चोर
राधा बोली,
वह मेरे मन को लगाये घोर
वह चोर नहि वह है चितचोर
गोवाले बोले ,
राधा राधा तेरा कान्हा मन को लुभाये
बासुरी बजाये वह है बडा जादुगर
राधा बोली,
वह बासुरी है बेजान
मेरा कान्हा फुके सुर उसमे जान
बासुरी गाये मेरा गुणगान
गोवाले बोले ,
राधा राधा तेरा कान्हा बडा लुटेरा
तेरे सहिलीयों के भी मन में किया बसेरा
वह कैसा होगा तेरा
राधा बोली ,
गोवाले, तुम बडे हो झुठीयारो
मेरा कान्हा नटखट
वह विश्र्वव्यापी होकर
बचा रहा मेरे मन के अंदर
– मोहंमद यूसुफ सय्यद
मो. ९७६४२५००५८

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